Sanskrit bio post

अहिंसासत्यास्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहा यमाः |

(पातञ्जलयोगसूत्र – २.३०)

ahiṃsāsatyāsteyabrahmacaryāparigrahā yamāḥ |

(pātañjalayogasūtra – 2.30)

अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह ये पांच यम हैं |

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Lord Shiva

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि ।
om tatpurusaya

vidmahe

mahadevaya

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात ॥

tanno

rudrah

pracodayata

Om, Let me meditate on the great Purusha, Oh, greatest God, give me higher intellect,
and let God Rudra illuminate my mind.

ओम, मैं देवताओं के महानतम, आदर्श पुरुष, महादेव पर ध्यान करता हूँ। भगवाल रुद्र, बुद्धि के साथ हमें आशीर्वाद दें और ज्ञान के साथ उजागर करें।

Souten Gayatri rudra Mantra

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Women’s Day

National women’s Day

आंतररष्ट्रीय महिला दिवस

स्त्रयै देवः स्त्रयै प्राणः

Women are gods, women themselves are life.

source – shaktistroth

नारियां देव हैं, नारियां स्वयं जीवन है।

१) यम, २) नियम, ३) आसन, ४) प्राणायाम, ५) प्रत्याहार, ६) धारणा ७) ध्यान ८) समाधि

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१) यम, २) नियम, ३) आसन, ४) प्राणायाम, ५) प्रत्याहार, ६) धारणा ७) ध्यान ८) समाधि

1. यम

यम मतलब नैतिकता, यम को जाने अनजाने सभी धर्मो ने बताया है हमें नैतिक होआ चाहिए हमें वैसा व्यवहार दूसरो के साथ नही करना चाहिए जो हम अपने साथ नही चाहते है I

अहिंसा – शब्दों से, विचारों से और कर्मों से किसी को हानि नहीं पहुँचाना
सत्य – विचारों में सत्यता, परम-सत्य में स्थित रहना
अस्तेय – चोर-प्रवृति का न होना
ब्रह्मचर्य – दो अर्थ हैं:
चेतना को ब्रह्म के ज्ञान में स्थिर करना
सभी इन्द्रिय-जनित सुखों में संयम बरतना
अपरिग्रह – आवश्यकता से अधिक संचय नहीं करना

2. नियम

पाँच व्यक्तिगत नैतिकता

शौच – शरीर और मन की शुद्धि
संतोष – अपनी स्थिति में सदा सन्तुष्ट रहना
तप – स्वयं से अनुशाषित रहना
स्वाध्याय – आत्मचिंतन करना
ईश्वर-प्रणिधान – इश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण, पूर्ण श्रद्धा
3. आसन

आसान का मतलब आसानी से बैठ जाओ शरीर ऐसा हो जाये जैसे मूर्ति क्यों की जैसा शरीर होता है वैसा मन होता है इसीलिए बुद्ध ने एक आसान पे जोड़ दिया है और धीरे धीरे अपने को आप पे निर्भर हो दुसरो कोच छोड़े. मन पे काबू करना है तो शरीर को स्थिर रखे शरीर को ढीला छोड़ दे

4. प्राणायाम

श्वास-लेने सम्बन्धी खास तकनीकों द्वारा प्राण पर नियंत्रण

5. प्रत्याहार

हमारी आँख देखने का कार्य करती है, नाक सूंघने का,कान सुनने का, जीभ से स्वाद का पता चलता है और त्वचा से स्पर्श का अनुभव होता है ! ये इंद्रिया विषयों की ओर जाकर अपनी प्रिय चीज की तलाश में रहती है जैसे हमारी आँख अच्छा दृश्य देखना पसंद करती है और ये देखना हमारी वासना व इच्छा पर निर्भर करता है असलियत में दृश्य तो आँख के पीछे बैठा मन देखना चाहता है, क्योंकि आँख तो केवल एक माध्यम है उस द्रश्य में आँख की पसंद ना पसंद कुछ नहीं होती,

इन्द्रियों को अंतर्मुखी करना ( महर्षि पतंजलि के अनुसार )
6. धारणा

एकाग्रचित्त होना अपने मन को वश में करना।

7. ध्यान

निरंतर ध्यान

8. समाधि

आत्मा से जुड़ना: शब्दों से परे परम-चैतन्य की अवस्था हम सभी समाधि का अनुभव करें !!!

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Shivaji Maharaj

Sanskrit shlok

इन्द्र त्वोतास आ वयं वज्रं घना ददीमहि । जयेम सं युधि स्पृध: ॥३॥


[ Source – ऋग्वेद-संहिता – प्रथम मंडल सूक्त ८ ]

हे इन्द्रदेव ! आपके द्वारा संरक्षित होकर तीक्ष्ण वज्रो को धारण् कर हम युद्ध मे स्पर्धा करने वाले शत्रुओ पर् विजय प्राप्त करें ॥३॥


Hey Lord Indra! Protected by you and holding the sharp thunderbolt, we can win the enemies who compete in battle.


7 chakra



शरीर के चक्र
शरीर में मूल रूप से 7 चक्र होते हैं. इन्हें सृष्टि की समस्त शक्तियों का केंद्र माना जाता है. आइए जानते हैं इन चक्रों के बारे में.

अनाहत चक्र

- ह्रदय के बीचों बीच रीढ़ की हड्डी पर स्थित चक्र को अनाहत चक्र कहा जाता है.

- आध्यात्मिक दृष्टि से यहीं से साधक के सतोगुण की शुरुआत होती है. इसी चक्र से व्यक्ति की भावनाएँ और अनुभूतियों की शुरुआत होती है.

- इस चक्र को सौर मंडल भी कहा जाता है. इसका वर्ण हल्का हरा है.

- इसका आकार षठकोण का है.

- इस चक्र में १२ पंखुड़ियां हैं

- इस चक्र से निम्न प्रकार की वृत्तियाँ नियंत्रित होती हैं - आशा,चिंता,चेष्टा,ममता,दंभ,विवेक,विकलता,अहंकार,लोलता,कपटता,वितर्क,अनुताप

- व्यक्ति की भावनाएँ और साधना की आंतरिक अनुभूतियाँ इस चक्र से सम्बन्ध रखती हैं.

- मानसिक अवसाद की दशा में इस चक्र पर गुरु ध्यान और प्राणायाम करना अदभुत परिणाम देता है.

- इस चक्र का बीज मंत्र है - "यं"

Anahata Chakra

- The chakra located on the spinal cord in the middle of the heart is called Anahata Chakra.

- From the spiritual point of view, the Satoguna of the seeker starts from here.  The person's feelings and feelings begin with this cycle.

- This cycle is also called solar system.  Its color is light green.

- Its shape is of a right angle.

- There are 12 petals in this cycle

- The following types of circles are controlled by this chakra - Asha, Anxiety, Chestha, Mamta, Dambha, Vivek, Perplexity, Arrogance, Lolata, Fraud, Vivek, Anushta

- A person's feelings and inner feelings of spiritual practice are related to this chakra.

- In the state of mental depression, Guru meditation and pranayama on this cycle gives amazing results.

- The seed mantra of this cycle is - "Yam"

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  शरीर के चक्र शरीर में मूल रूप से 7 चक्र होते हैं. इन्हें सृष्टि की समस्त शक्तियों का केंद्र माना जाता है. आइए जानते हैं इन चक्रों के बारे में.  अनाहत चक्र  – ह्रदय के बीचों बीच रीढ़ की हड्डी पर स्थित चक्र को अनाहत चक्र कहा जाता है.  – आध्यात्मिक दृष्टि से यहीं से साधक के सतोगुण की शुरुआत होती है. इसी चक्र से व्यक्ति की भावनाएँ और अनुभूतियों की शुरुआत होती है.  – इस चक्र को सौर मंडल भी कहा जाता है. इसका वर्ण हल्का हरा है.  – इसका आकार षठकोण का है.  – इस चक्र में १२ पंखुड़ियां हैं  – इस चक्र से निम्न प्रकार की वृत्तियाँ नियंत्रित होती हैं – आशा,चिंता,चेष्टा,ममता,दंभ,विवेक,विकलता,अहंकार,लोलता,कपटता,वितर्क,अनुताप  – व्यक्ति की भावनाएँ और साधना की आंतरिक अनुभूतियाँ इस चक्र से सम्बन्ध रखती हैं.  – मानसिक अवसाद की दशा में इस चक्र पर गुरु ध्यान और प्राणायाम करना अदभुत परिणाम देता है.  – इस चक्र का बीज मंत्र है – “यं” 

Anahata Chakra  – The chakra located on the spinal cord in the middle of the heart is called Anahata Chakra.  – From the spiritual point of view, the Satoguna of the seeker starts from here.  The person’s feelings and feelings begin with this cycle.  – This cycle is also called solar system.  Its color is light green.  – Its shape is of a right angle.  – There are 12 petals in this cycle  – The following types of circles are controlled by this chakra – Asha, Anxiety, Chestha, Mamta, Dambha, Vivek, Perplexity, Arrogance, Lolata, Fraud, Vivek, Anushta  – A person’s feelings and inner feelings of spiritual practice are related to this chakra.  – In the state of mental depression, Guru meditation and pranayama on this cycle gives amazing results.  – The seed mantra of this cycle is – “Yam”

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7 chakra

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शरीर के चक्र
शरीर में मूल रूप से 7 चक्र होते हैं. इन्हें सृष्टि की समस्त शक्तियों का केंद्र माना जाता है. आइए जानते हैं इन चक्रों के बारे में.

विशुद्ध चक्र

– कंठ के ठीक पीछे स्थित चक्र है – विशुद्ध चक्र

– यह चक्र और भी उच्चतम आध्यात्मिक अनुभूतियाँ देता है , सारी की सारी सिद्धियाँ इसी चक्र में पायी जाती हैं.

– यह चक्र बहुरंगा है और इसका कोई एक ख़ास स्वरुप नही है.

– यह चक्र आकाश तत्त्व और आठों सिद्धियों से सम्बन्ध रखता है.

– इस चक्र की १६ पंखुड़ियां हैं

– कुंडली शक्ति का जागरण होने से जो ध्वनि आती है वह इसी चक्र से आती है

– इसका बीज मंत्र है – “हं”

– इस चक्र से निम्न वृत्तियाँ नियंत्रित होती हैं – भौतिक ज्ञान,कल्याण,महान कार्य,ईश्वर में समर्पण,विष और अमृत

– इस चक्र के गड़बड़ होने से वैज्ञानिक रूप से थाईराइड जैसी समस्याएँ और वाणी की विकृति पैदा होती है

– संगीत के सातों सुर इसी चक्र का खेल हैं

Pure wheel

– Chakra located just behind the throat is pure chakra

– This chakra gives even the highest spiritual experiences, all the accomplishments are found in this chakra.

– This cycle is multicolor and it has no particular form.

– This cycle is related to the sky element and the eight siddhis.

– This circle has 14 petals

– The sound that comes from awakening of the horoscope power comes from this cycle.

– Its seed mantra is – “Huh”

– The following circles are governed by this cycle – material knowledge, welfare, great work, surrender to God, poison and nectar

– Disturbance of this cycle causes scientifically thyroid-like problems and speech distortion.

– The seven notes of music are the game of this cycle

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7 chakra

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शरीर के चक्र
शरीर में मूल रूप से 7 चक्र होते हैं. इन्हें सृष्टि की समस्त शक्तियों का केंद्र माना जाता है. आइए जानते हैं इन चक्रों के बारे में.
आज्ञा चक्र
ऊँ आज्ञाचक्राब्जनिलयायै नमः
Om agya-chakraa-bahja-nilayāyei namaha
– दोनों भौहों के बीच स्थित चक्र को आज्ञा चक्र कहा जाता है.
– यह दो पंखुड़ियों वाला है , एक पंखुड़ी काले रंग की और दूसरी पंखुड़ी सफ़ेद रंग की है.
– सफ़ेद पंखुड़ी ईश्वर की ओर जाने का प्रतीक है , और काली पंखुड़ियों का अर्थ संसारिकता की ओर जाने का है .
– इस चक्र के दो अक्षर और दो बीज मंत्र हैं – ह और क्ष
– इस चक्र का कोई ध्यान मंत्र नहीं है क्योंकि यह पांच तत्वों और मन से ऊपर होता है.
– इस चक्र पर मंत्र का आघात करने से शरीर के सारे चक्र नियंत्रित होते हैं.
– इसी चक्र पर इडा,पिंगला और सुषुम्ना आकार खुल जाती हैं और मन मुक्त अवस्था में पंहुँच जाता है.
– The chakra situated between the two eyebrows is called the command cycle.
– It has two petals, one petal black and the other petal white.
– White petals symbolize the direction of God, and black petals mean towards worldliness.
– There are two letters and two bija mantras of this cycle – H and K
– This chakra has no meditation mantra because it is above the five elements and the mind.
– By chanting the mantra on this chakra, all the chakras of the body are controlled.
– Ida, Pingala and Sushumna shapes open on this cycle and the mind reaches its free state.
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7 chakra series

चक्र क्या है , आपको पता है , उसके लाभ क्या है तो .

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शरीर के चक्र
शरीर में मूल रूप से 7 चक्र होते हैं. इन्हें सृष्टि की समस्त शक्तियों का केंद्र माना जाता है. आइए जानते हैं इन चक्रों के बारे में.

सहस्त्रार चक्र

– मष्तिष्क के सबसे उपरी हिस्से पर जो चक्र स्थित होता है , उसे सहस्त्रार कहा जाता है.

– यह सहस्त्र पंखुड़ियों वाला है , और बिलकुल उजले सफ़ेद रंग का है.

– इस चक्र का न तो कोई धयान मंत्र है और न ही कोई बीज मंत्र , इस चक्र पर केवल गुरु का ध्यान किया जाता है.

– कुण्डलिनी जब इस चक्र पर पहुँचती है तब जाकर वह साधना की पूर्णता पाती है और मुक्ति की अवस्था में आ जाती है.

– इसी स्थान को तंत्र में काशी कहा जाता है

– इस स्थान पर सदगुरु का ध्यान या कीर्तन करने से व्यक्ति के मुक्ति मोक्ष का मार्ग सहज हो जाता है.

Body chakra
There are basically 7 chakras in the body. They are considered to be the center of all the powers of the universe. Let’s know about these cycles.

Sahastrar Chakra

– The chakra which is located on the topmost part of the brain is called Sahastrar.

– It is millennial petal, and is very bright white color.

– There is neither any meditation mantra nor any seed mantra of this cycle, only Guru is meditated on this cycle.

– When the Kundalini reaches this cycle, then she gets the fullness of spiritual practice and comes to a state of liberation.

– This place is called Kashi in Tantra.

– By meditating or doing kirtan of Sadguru at this place, the path of liberation salvation of the person gets smoothed.

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Introduce Yourself (Example Post)

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Why do this?

  • Because it gives new readers context. What are you about? Why should they read your blog?
  • Because it will help you focus your own ideas about your blog and what you’d like to do with it.

The post can be short or long, a personal intro to your life or a bloggy mission statement, a manifesto for the future or a simple outline of your the types of things you hope to publish.

To help you get started, here are a few questions:

  • Why are you blogging publicly, rather than keeping a personal journal?
  • What topics do you think you’ll write about?
  • Who would you love to connect with via your blog?
  • If you blog successfully throughout the next year, what would you hope to have accomplished?

You’re not locked into any of this; one of the wonderful things about blogs is how they constantly evolve as we learn, grow, and interact with one another — but it’s good to know where and why you started, and articulating your goals may just give you a few other post ideas.

Can’t think how to get started? Just write the first thing that pops into your head. Anne Lamott, author of a book on writing we love, says that you need to give yourself permission to write a “crappy first draft”. Anne makes a great point — just start writing, and worry about editing it later.

When you’re ready to publish, give your post three to five tags that describe your blog’s focus — writing, photography, fiction, parenting, food, cars, movies, sports, whatever. These tags will help others who care about your topics find you in the Reader. Make sure one of the tags is “zerotohero,” so other new bloggers can find you, too.

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